रात के करीब 11 बजे अमन अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। स्टेशन छोटा था और उस समय पूरा प्लेटफॉर्म लगभग खाली था।
अचानक उसे प्लेटफॉर्म के दूसरे छोर पर एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया।
बूढ़ा लगातार पटरी की तरफ देख रहा था।
अमन ने पूछा, “बाबा, ट्रेन कब आएगी?”
बूढ़े ने उसकी तरफ देखे बिना कहा—
“तुम्हारी ट्रेन आएगी ही नहीं।”
अमन हँस पड़ा।
“क्यों?”
बूढ़े ने धीरे से कहा—
“क्योंकि यह प्लेटफॉर्म अब इस्तेमाल नहीं होता।”
अमन ने चारों तरफ देखा।
प्लेटफॉर्म पर लगी लाइटें जल रही थीं। स्टेशन का बोर्ड भी साफ दिखाई दे रहा था।
उसने अपना टिकट देखा।
टिकट पर इसी स्टेशन का नाम था।
अजीब ट्रेन
कुछ मिनट बाद दूर से ट्रेन की रोशनी दिखाई दी।
अमन ने राहत की साँस ली।
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी।
लेकिन उसमें कोई यात्री नहीं था।
डिब्बों की सारी खिड़कियाँ काली थीं।
अमन ने दरवाज़ा खोला और अंदर चढ़ गया।
अंदर बैठने के बाद उसने खिड़की से बाहर देखा।
वह बूढ़ा आदमी अभी भी प्लेटफॉर्म पर खड़ा था।
लेकिन अब उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी।
वह तस्वीर अमन की थी।
ट्रेन के अंदर
अमन ने तुरंत उतरने की कोशिश की।
दरवाज़ा बंद हो चुका था।
ट्रेन चल पड़ी।
उसने मोबाइल निकाला, लेकिन नेटवर्क गायब था।
तभी स्पीकर से आवाज़ आई—
“अगला स्टेशन—पुराना जंक्शन।”
अमन ने कभी इस नाम का स्टेशन नहीं सुना था।
कुछ देर बाद ट्रेन एक सुनसान प्लेटफॉर्म पर रुकी।
वहाँ कोई नहीं था।
सिर्फ़ एक बोर्ड लगा था—
“यात्रियों का स्वागत है।”
आखिरी सीट
अमन ट्रेन के आखिरी डिब्बे में गया।
वहाँ वही बूढ़ा आदमी बैठा था।
अमन डर गया।
“आप यहाँ कैसे?”
बूढ़े ने कहा—
“मैं हर रात इसी ट्रेन का इंतज़ार करता हूँ।”
“क्यों?”
बूढ़ा मुस्कुराया।
“क्योंकि मैं भी कभी तुम्हारी तरह इसमें चढ़ा था।”
अमन ने पूछा—
“फिर वापस क्यों नहीं गए?”
बूढ़े ने खिड़की की तरफ देखते हुए कहा—
“क्योंकि इस ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री अपने स्टेशन तक नहीं पहुँचते।”
सुबह का सच
अगली सुबह अमन का परिवार पुलिस स्टेशन पहुँचा।
वह पूरी रात घर नहीं लौटा था।
उसका मोबाइल स्टेशन के पास मिला।
लेकिन अमन नहीं मिला।
पुलिस ने स्टेशन की CCTV फुटेज देखी।
फुटेज में अमन रात 11 बजे प्लेटफॉर्म पर खड़ा दिखाई दिया।
फिर कुछ देर बाद…
वह अकेले पटरी की तरफ चलता हुआ दिखाई दिया।
लेकिन फुटेज में कोई ट्रेन नहीं थी।
कोई बूढ़ा आदमी नहीं था।
और सबसे अजीब बात—
उस स्टेशन पर उस रात कोई ट्रेन आई ही नहीं थी।
आज भी स्थानीय लोग उस घटना को एक real horror story in hindi की तरह सुनाते हैं।
कहा जाता है कि रात के समय उस पुराने प्लेटफॉर्म पर कभी-कभी ट्रेन की आवाज़ सुनाई देती है।
लेकिन अगर आप वहाँ खड़े होकर ध्यान से सुनें…
तो ट्रेन के हॉर्न के साथ एक आवाज़ भी आती है—
“अगला स्टेशन… तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।”
शायद यही वजह है कि ऐसी horror story in hindi सुनने के बाद लोग सुनसान रेलवे स्टेशनों पर रात में अकेले जाने से बचते हैं।
और इंटरनेट पर मौजूद कई unexpected stories की तरह इस घटना का भी कोई पक्का जवाब नहीं मिला।
क्योंकि कुछ यात्राएँ…
मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं होतीं।
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Unexpected stories.in
