गाँव के बाहर एक सड़क थी जो करीब दो किलोमीटर बाद अचानक खत्म हो जाती थी।
उसके आगे सिर्फ़ जंगल था।
लोग उस रास्ते पर रात में जाने से बचते थे।
लेकिन अमन को इन बातों पर कभी विश्वास नहीं रहा।
उस रात भी वह अपनी बाइक से शहर से गाँव लौट रहा था। बारिश शुरू हो चुकी थी और मुख्य सड़क पानी में डूब गई थी।
Google Maps ने उसे एक दूसरा रास्ता दिखाया।
एक सुनसान कच्ची सड़क।
अमन ने बाइक मोड़ दी।
उसे क्या पता था कि यही रास्ता उसे उस घर तक ले जाने वाला था, जिसका नाम गाँव में लोग तक नहीं लेते थे।
करीब दस मिनट बाद उसकी बाइक अचानक बंद हो गई।
मोबाइल में नेटवर्क नहीं था।
चारों तरफ अंधेरा था।
अमन ने बाइक दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की।
कुछ नहीं हुआ।
तभी दूर उसे एक पीली रोशनी दिखाई दी।
जंगल के बीच एक छोटा-सा घर था।
अमन ने सोचा, शायद वहाँ मदद मिल जाए।
वह बाइक छोड़कर घर की तरफ चल पड़ा।
दरवाज़े तक पहुँचते ही अंदर से आवाज़ आई—
“अंदर आ जाओ।”
अमन रुक गया।
उसने दरवाज़ा खटखटाया भी नहीं था।
फिर आवाज़ आई—
“बारिश में बाहर क्यों खड़े हो?”
अमन ने धीरे से दरवाज़ा खोला।
अंदर एक बूढ़ी औरत बैठी थी।
कमरे में एक लालटेन जल रही थी।
उसने अमन को देखकर कहा—
“तुम बहुत देर से आ रहे हो।”
अमन ने हैरानी से पूछा—
“आप मुझे जानती हैं?”
बूढ़ी औरत मुस्कुराई।
“तुम्हें नहीं… लेकिन तुम्हारे आने का इंतज़ार था।”
अमन को उसकी बात अजीब लगी।
फिर भी बारिश के कारण वह अंदर बैठ गया।
बूढ़ी औरत ने उसके लिए चाय बनाई।
कमरे में पुरानी तस्वीरें लगी थीं।
अमन की नजर एक तस्वीर पर जाकर रुक गई।
उसमें वही घर था।
लेकिन तस्वीर बहुत पुरानी लग रही थी।
नीचे साल लिखा था—
1987
अमन ने पूछा—
“यह घर इतना पुराना है?”
बूढ़ी औरत ने जवाब नहीं दिया।
उसने सिर्फ़ कहा—
“आज रात बाहर मत जाना।”
“क्यों?”
“क्योंकि सड़क पर जो दिखाई देता है, वह हमेशा सड़क नहीं होती।”
अमन हँस पड़ा।
उसे लगा बूढ़ी औरत उसे डराने की कोशिश कर रही है।
रात करीब 1 बजे अमन की आँख खुली।
घर बिल्कुल शांत था।
बूढ़ी औरत कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
तभी उसे बाहर से बाइक के इंजन की आवाज़ सुनाई दी।
अमन खिड़की के पास गया।
बाहर उसकी बाइक खड़ी थी।
हेडलाइट जल रही थी।
लेकिन उसकी बाइक तो स्टार्ट ही नहीं हो रही थी।
अमन ने दरवाज़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया।
उसी समय पीछे से आवाज़ आई—
“मत जाना।”
वह पलटा।
बूढ़ी औरत दरवाज़े के पास खड़ी थी।
उसका चेहरा इस बार बिल्कुल गंभीर था।
“अगर बाहर तुम्हें कोई दिखाई दे… तो उससे बात मत करना।”
अमन ने पूछा—
“कौन?”
बूढ़ी औरत ने खिड़की की तरफ देखा।
“तुम खुद।”
अमन के चेहरे का रंग उड़ गया।
कुछ सेकंड बाद बाहर से आवाज़ आई—
“अमन!”
वह उसकी अपनी आवाज़ थी।
फिर बाहर खड़ा कोई व्यक्ति बोला—
“दरवाज़ा खोलो।”
अमन खिड़की से देखने लगा।
बारिश के बीच एक आदमी घर के सामने खड़ा था।
उसके कपड़े अमन जैसे थे।
उसके हाथ में वही मोबाइल था।
और चेहरा…
अमन का था।
वह बाहर वाला अमन दरवाज़े की तरफ बढ़ा।
“मैं रास्ते में फँस गया हूँ। मुझे अंदर आने दो।”
अमन पीछे हट गया।
बूढ़ी औरत ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“इसे अंदर आने दिया तो तुम दोनों में से कौन असली है, यह पता लगाना मुश्किल होगा।”
बाहर खड़ा दूसरा अमन कुछ देर तक दरवाज़े को देखता रहा।
फिर अचानक वह मुस्कुराया।
उसने कहा—
“ठीक है। मैं सुबह तक इंतज़ार करता हूँ।”
वह घर के सामने ही बैठ गया।
पूरी रात।
अमन सो नहीं पाया।
सुबह बारिश बंद हुई।
बूढ़ी औरत ने दरवाज़ा खोला।
बाहर कोई नहीं था।
अमन ने राहत की साँस ली।
उसने अपनी बाइक स्टार्ट की।
इस बार बाइक पहली कोशिश में चल गई।
वह बूढ़ी औरत को धन्यवाद कहकर सड़क पर निकल गया।
कुछ दूरी पर उसे एक आदमी दिखाई दिया।
वह सड़क के किनारे बैठा था।
अमन ने बाइक रोकी।
वह आदमी धीरे-धीरे उठा।
अमन की साँस रुक गई।
वह वही आदमी था।
उसका दूसरा रूप।
लेकिन इस बार वह घायल था।
उसने अमन से कहा—
“तुम बच गए।”
अमन ने काँपते हुए पूछा—
“तुम कौन हो?”
वह मुस्कुराया।
“मैं वही हूँ जो कल रात उस घर में रुक गया था।”
अमन ने पीछे मुड़कर देखा।
जहाँ वह घर था…
वहाँ सिर्फ़ घना जंगल था।
कोई घर नहीं।
कोई सड़क नहीं।
कुछ भी नहीं।
अमन किसी तरह गाँव पहुँचा।
उसने लोगों को पूरी घटना बताई।
एक बूढ़े आदमी ने उसका चेहरा देखते ही कहा—
“तुम उस रास्ते पर गए थे?”
अमन ने सिर हिलाया।
बूढ़े ने कुछ देर चुप रहकर कहा—
“वहाँ कोई घर नहीं है।”
अमन ने कहा—
“मैंने अपनी आँखों से देखा था।”
बूढ़े ने जवाब दिया—
“वहाँ करीब चालीस साल पहले एक घर हुआ करता था।”
“फिर?”
“एक रात घर में आग लगी। परिवार के सभी लोग मर गए।”
अमन ने पूछा—
“वह बूढ़ी औरत?”
बूढ़े ने उसकी तरफ देखा।
“उस घर में एक बूढ़ी औरत भी थी।”
“क्या वह भी मर गई?”
बूढ़े ने सिर हिलाया।
“हाँ। उसी रात।”
अमन ने कुछ दिनों तक इस घटना के बारे में किसी से बात नहीं की।
लेकिन एक बात उसे लगातार परेशान करती रही।
उसके मोबाइल में उस रात की एक फोटो मौजूद थी।
उसने फोटो खुद नहीं खींची थी।
फिर भी फोटो में वही पुराना घर साफ़ दिखाई दे रहा था।
दरवाज़े के सामने बूढ़ी औरत खड़ी थी।
और उसके पीछे…
एक आदमी खड़ा था।
वह आदमी अमन था।
लेकिन तस्वीर के नीचे तारीख़ थी—
1987
और फोटो के पीछे सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
“अगली बार तुम्हें अकेले नहीं आने दिया जाएगा।”
आज भी गाँव के लोग उस रास्ते से रात में नहीं गुजरते।
कुछ लोगों ने वहाँ पीली रोशनी देखने की बात कही है।
किसी ने बूढ़ी औरत की आवाज़ सुनी।
और एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसने सड़क पर खुद को खड़ा देखा था।
अमन की घटना को लोग एक real horror story in hindi के रूप में सुनाते हैं, लेकिन वह आज भी इस बारे में किसी से ज्यादा बात नहीं करता।
क्योंकि उसके मुताबिक असली डर उस रात नहीं था।
असली डर तो कुछ महीनों बाद शुरू हुआ…
जब एक शाम उसके घर की घंटी बजी।
दरवाज़ा खोलने पर बाहर कोई नहीं था।
लेकिन फर्श पर कीचड़ से बने दो पैरों के निशान थे।
वे निशान…
सीधे उसके कमरे तक गए थे।
ऐसी horror story in hindi शायद इसलिए ज्यादा डरावनी लगती है क्योंकि इसमें कोई सुनसान घर ही डर का कारण नहीं होता।
कभी-कभी डर हमारे अपने चेहरे में छिपा होता है।
और यही वजह है कि ऐसी unexpected stories सुनने के बाद इंसान एक सवाल जरूर सोचता है—
अगर उस रात घर के अंदर असली अमन था… तो सड़क पर खड़ा दूसरा अमन कौन था?
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