अभय को अपने दादा का पुराना घर विरासत में मिला था।
घर काफी बड़ा था, लेकिन कई सालों से बंद पड़ा था। सफाई करते समय अभय को ऊपर की मंज़िल पर एक अजीब दरवाज़ा मिला।
उसने घर का नक्शा देखा।
उस जगह पर कोई कमरा बना ही नहीं था।
फिर यह दरवाज़ा किसका था?
बंद दरवाज़ा
अभय ने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।
दरवाज़ा आसानी से खुल गया।
अंदर एक छोटा-सा कमरा था।
एक मेज।
एक कुर्सी।
एक पुरानी घड़ी।
और दीवार पर परिवार की तस्वीरें।
अभय तस्वीरें देखने लगा।
उसे एक तस्वीर देखकर अजीब लगा।
तस्वीर में उसके दादा और परिवार के बाकी सदस्य खड़े थे।
लेकिन उनके बीच एक छोटी लड़की भी थी।
अभय उस लड़की को पहचान नहीं पाया।
दादी से सवाल
अभय ने नीचे जाकर अपनी दादी से तस्वीर के बारे में पूछा।
दादी का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
उन्होंने कहा—
“इस कमरे के बारे में कभी किसी से बात मत करना।”
अभय ने पूछा—
“लेकिन यह लड़की कौन है?”
दादी ने कुछ नहीं कहा।
बस धीरे से बोलीं—
“हमारे परिवार में ऐसी कोई लड़की नहीं थी।”
आधी रात
उस रात अभय अपने कमरे में सो रहा था।
रात 2 बजे ऊपर से घड़ी की आवाज़ आई।
टिक… टिक… टिक…
वह ऊपर गया।
वही बंद कमरा खुला हुआ था।
अंदर रखी घड़ी चल रही थी।
जबकि उसमें बैटरी नहीं थी।
घड़ी के नीचे एक कागज़ रखा था।
उस पर लिखा था—
“तुम मुझे याद क्यों नहीं करते?”
पुरानी डायरी
अभय ने कमरे की मेज खोली।
अंदर एक डायरी मिली।
डायरी उसके दादा की थी।
उसमें लिखा था कि कई साल पहले परिवार में एक बच्ची थी।
उसका नाम मीरा था।
एक रात वह घर के अंदर से गायब हो गई।
परिवार ने उसे ढूँढा, लेकिन कभी नहीं मिली।
कुछ महीनों बाद सभी ने उसके बारे में बात करना बंद कर दिया।
अभय की आँखें डायरी पर टिक गईं।
क्योंकि आखिरी पन्ने पर लिखा था—
“मीरा गई नहीं है। वह इसी घर में है।”
आईने के सामने
अभय ने कमरे में लगे पुराने आईने के सामने खड़े होकर देखा।
आईने में वह अकेला था।
फिर अचानक उसके पीछे एक बच्ची दिखाई दी।
अभय ने तुरंत पलटकर देखा।
कोई नहीं था।
वह दोबारा आईने की तरफ मुड़ा।
बच्ची अब उसके बिल्कुल पास खड़ी थी।
उसने धीरे से पूछा—
“तुम मेरे भाई हो?”
अभय के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।
उसे बचपन से हमेशा लगता था कि उसके परिवार की कोई कहानी उससे छिपाई गई है।
आखिरी पन्ना
अभय ने डायरी का आखिरी पन्ना खोला।
वहाँ सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
“जब कोई मुझे याद करेगा, कमरा फिर बंद हो जाएगा।”
अभय ने पीछे देखा।
मीरा दरवाज़े के पास खड़ी थी।
वह मुस्कुराई।
फिर धीरे-धीरे गायब हो गई।
कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
सुबह अभय ने दादी को सब बताया।
दादी कुछ देर चुप रहीं।
फिर उन्होंने कहा—
“शायद अब वह आखिरकार जा सकती है।”
अभय ने पूछा—
“आपने इतने साल मुझे उसके बारे में क्यों नहीं बताया?”
दादी ने उसकी तरफ देखा और बोलीं—
“क्योंकि जो उसे याद करता है… उसे वह भी याद कर लेती है।”
उस दिन के बाद वह कमरा फिर कभी नहीं खुला।
अभय ने घर बेचने का फैसला कर लिया।
लेकिन घर छोड़ने से पहले उसने उस पुरानी तस्वीर को एक बार फिर देखा।
तस्वीर में अब एक बदलाव था।
पहले मीरा के बगल में कोई नहीं था।
अब उसके पास…
अभय खड़ा था।
कई लोग इस घटना को एक real horror story in hindi मानते हैं, लेकिन अभय के परिवार ने इस बारे में कभी सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा।
फिर भी उस पुराने घर को जानने वाले लोग बताते हैं कि रात में ऊपर की मंज़िल से कभी-कभी बच्चे के हँसने की आवाज़ आती है।
शायद इसी वजह से ऐसी horror story in hindi सिर्फ़ डराने वाली नहीं लगतीं—कभी-कभी परिवार के छिपे हुए राज़ भी डरावने हो सकते हैं।
और इंटरनेट की कई unexpected stories की तरह इस कहानी का भी सबसे बड़ा सवाल आज तक अनसुलझा है—
अगर परिवार में मीरा थी ही नहीं, तो पुरानी तस्वीरों में वह हर बार दिखाई क्यों देती थी?
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