अभिषेक रात में कार चलाना पसंद करता था।
उस रात भी वह शहर से बाहर एक सुनसान हाईवे पर जा रहा था।
बारिश के कारण सड़क लगभग खाली थी।
करीब 1 बजे उसने रियर-व्यू मिरर में देखा।
पीछे एक आदमी बैठा था।
अभिषेक ने तुरंत ब्रेक लगाया।
कार रोककर पीछे देखा।
पीछे की सीट खाली थी।
उसने खुद से कहा—
“शायद थकान की वजह से भ्रम हुआ।”
और कार फिर चला दी।
कुछ मिनट बाद उसने दोबारा शीशे में देखा।
वही आदमी।
इस बार वह सीधे अभिषेक को देख रहा था।
अभिषेक ने रेडियो चालू किया।
रेडियो में अचानक आवाज़ आई—
“पीछे मत देखना।”
उसने रेडियो बंद कर दिया।
कुछ सेकंड बाद पीछे से हल्की आवाज़ आई—
“मुझे घर जाना है।”
अभिषेक के हाथ स्टीयरिंग पर जम गए।
उसने शीशे में देखा।
आदमी अब और पास दिखाई दे रहा था।
उसने पूछा—
“तुम कौन हो?”
कोई जवाब नहीं आया।
फिर आदमी ने धीरे से कहा—
“तुम मुझे पहले भी छोड़ चुके हो।”
अभिषेक को कुछ समझ नहीं आया।
अचानक उसके मोबाइल पर एक पुरानी फोटो खुल गई।
फोटो में उसकी कार थी।
सड़क वही थी।
पीछे वही आदमी खड़ा था।
फोटो की तारीख़ देखकर अभिषेक का चेहरा सफेद पड़ गया।
वह फोटो…
पाँच साल पुरानी थी।
उसे याद आया कि पाँच साल पहले इसी हाईवे पर उसकी कार से एक आदमी घायल हुआ था।
अभिषेक डरकर वहाँ से चला गया था।
उसने कभी किसी को नहीं बताया।
पीछे बैठे आदमी ने कहा—
“आज तुम मुझे घर छोड़ोगे।”
अभिषेक ने कार रोक दी।
वह आदमी इस बार सीट पर नहीं था।
लेकिन दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
बाहर एक पुराना मकान दिखाई दिया।
आदमी की आवाज़ आई—
“यही मेरा घर है।”
अभिषेक ने बाहर देखा।
घर कई सालों से बंद पड़ा था।
दरवाज़े पर लगी तस्वीर देखकर उसकी साँस रुक गई।
वही आदमी।
नीचे लिखा था—
“मृत्यु: पाँच वर्ष पूर्व।”
अभिषेक कार में वापस बैठ गया।
उसने पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।
फिर अचानक किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
वह चौंक गया।
पीछे कोई नहीं था।
लेकिन रियर-व्यू मिरर में…
वह आदमी मुस्कुरा रहा था।
उसने कहा—
“अब तुम्हारी बारी है।”
अगली सुबह हाईवे के किनारे अभिषेक की कार मिली।
दरवाज़े खुले थे।
चाबी अंदर थी।
लेकिन अभिषेक गायब था।
पुलिस को कार के रियर-व्यू मिरर पर उंगली से लिखा एक वाक्य मिला—
“वह अकेला नहीं था।”
इस घटना को कई लोग एक real horror story in hindi की तरह सुनाते हैं।
आज भी उस हाईवे पर रात में कुछ ड्राइवर दावा करते हैं कि उनकी कार के पीछे अचानक एक आदमी दिखाई देता है।
ऐसी horror story in hindi में डर सिर्फ़ उस आदमी का नहीं है, बल्कि उस सच का है जिसे इंसान सालों तक खुद से छिपा सकता है।
और ऐसी unexpected stories कभी-कभी यह सवाल छोड़ जाती हैं—
अगर अतीत वापस सड़क पर खड़ा हो जाए, तो क्या उससे बचने का कोई रास्ता होता है?
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