साल 2019 की बात है। उत्तराखंड की ऊँची पहाड़ियों के बीच एक पुरानी रेलवे सुरंग थी, जिसे लगभग पच्चीस साल पहले हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में इसकी वजह “भूस्खलन” लिखी गई थी, लेकिन स्थानीय लोग आज भी मानते हैं कि असली कारण कुछ और था।
उस सुरंग के बारे में एक अजीब बात मशहूर थी।
अगर कोई इंसान रात 12:13 बजे सुरंग के अंदर खड़ा होकर अपना नाम बोल दे…
तो सुरंग उसका नाम वापस दोहराती है।
लेकिन उसकी आवाज़ में नहीं।
किसी और की आवाज़ में।
और उसके बाद…
वह इंसान कभी पहले जैसा नहीं रहता।
अगर आपको real horror story in hindi पढ़ना पसंद है, तो यह कहानी शायद आपकी सोच बदल दे।
रहस्य की शुरुआत
राघव एक फ़्रीलांस वीडियोग्राफ़र था। उसे वीरान और रहस्यमयी जगहों की वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डालना पसंद था।
एक दिन उसे एक ईमेल मिला।
उसमें सिर्फ़ एक फोटो थी।
एक लंबी अँधेरी सुरंग।
नीचे एक लाइन लिखी थी—
“अगर हिम्मत है… तो आधी रात को यहाँ अपना नाम पुकारना।”
ईमेल भेजने वाले का नाम नहीं था।
न कोई नंबर।
सिर्फ़ लोकेशन।
राघव ने इसे अपनी अगली डॉक्यूमेंट्री का विषय बना लिया।
गाँव वालों की चेतावनी
अगले दिन वह उस गाँव पहुँचा।
गाँव के लोग पहले तो उससे बात करने को तैयार ही नहीं हुए।
बहुत पूछने पर एक बुज़ुर्ग बोले—
“सुरंग में जाना है तो चले जाओ…
लेकिन अगर कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए…
तो पीछे मत मुड़ना।”
राघव मुस्कुराया।
उसे लगा यह भी कोई लोककथा होगी।
बंद सुरंग
सूरज ढलने के बाद वह कैमरा लेकर सुरंग तक पहुँचा।
लोहे का बड़ा गेट आधा टूटा हुआ था।
अंदर घना अंधेरा था।
हवा इतनी ठंडी थी कि जुलाई के महीने में भी साँस से धुआँ निकल रहा था।
जैसे ही उसने पहला कदम रखा…
उसका मोबाइल नेटवर्क गायब हो गया।
घड़ी रुक गई।
और कैमरे की स्क्रीन कुछ सेकंड के लिए काली हो गई।
पहली फुसफुसाहट
रात के ठीक 12:13 बजे…
राघव ने ज़ोर से कहा—
“राघव…”
पूरा माहौल शांत हो गया।
करीब दस सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं आई।
फिर…
सुरंग के बहुत अंदर से किसी ने धीरे-धीरे कहा—
“रा…घ…व…”
लेकिन वह आवाज़ इंसान जैसी नहीं थी।
ऐसा लग रहा था जैसे कई लोग एक साथ उसका नाम बोल रहे हों।
कदमों की आवाज़
अचानक सुरंग के अंदर से किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।
टक…
टक…
टक…
राघव ने टॉर्च आगे की।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन आवाज़ लगातार पास आती जा रही थी।
जैसे कोई अंधेरे में दिखाई दिए बिना चल रहा हो।
पुरानी ट्रेन
कुछ दूर जाने पर उसे जंग लगी रेलवे पटरी दिखाई दी।
उसी समय दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी।
राघव हैरान रह गया।
इस लाइन पर पिछले पच्चीस साल से कोई ट्रेन नहीं चली थी।
कुछ सेकंड बाद…
पूरा अंधेरा तेज़ रोशनी से भर गया।
एक पुरानी भाप वाली ट्रेन सुरंग के अंदर उसकी तरफ़ आ रही थी।
उसने घबराकर दीवार से खुद को चिपका लिया।
लेकिन ट्रेन उसके सामने से गुजरते हुए…
उसके शरीर को छुए बिना निकल गई।
जैसे वह वास्तव में वहाँ थी ही नहीं।
खाली डिब्बे
राघव ने पीछे मुड़कर देखा।
ट्रेन के सभी डिब्बे खाली थे।
सिर्फ़ आख़िरी डिब्बे की खिड़की में एक छोटी लड़की बैठी थी।
वह मुस्कुरा रही थी।
उसने धीरे से हाथ हिलाया।
फिर उँगली से इशारा किया—
“पीछे देखो…”
राघव ने जैसे ही पीछे देखा…
उसके ठीक पीछे एक लंबा साया खड़ा था।
चेहरा पूरी तरह अंधेरे में छिपा हुआ।
कैमरे की गड़बड़ी
डर के बावजूद उसने कैमरा उस साए की तरफ़ घुमा दिया।
लेकिन स्क्रीन पर कुछ और ही दिखाई दिया।
वहाँ कोई साया नहीं था।
बल्कि…
राघव खुद खड़ा था।
और कैमरे की तरफ़ देखकर मुस्कुरा रहा था।
जबकि असल में उसके चेहरे पर डर साफ़ दिखाई दे रहा था।
सुरंग का कमरा
आगे बढ़ने पर उसे एक लोहे का दरवाज़ा मिला।
उस पर अंग्रेज़ी में लिखा था—
Maintenance Room
दरवाज़ा खुला हुआ था।
अंदर एक लकड़ी की मेज़, टूटी कुर्सी और एक पुरानी डायरी रखी थी।
डायरी के आख़िरी पन्ने पर लिखा था—
“अगर यह पढ़ रहे हो…
तो समझ लो कि उसने तुम्हारा नाम सुन लिया है।
अब वह तुम्हें जाने नहीं देगा।”
रिकॉर्डिंग जिसने सब बदल दिया
सुबह किसी तरह राघव सुरंग से बाहर निकल आया।
उसे लगा कि अब सब खत्म हो गया।
घर पहुँचकर उसने कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी।
वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा था कि पूरी रात वह किसी से बात कर रहा था।
लेकिन कैमरे में उसके सामने कोई नहीं था।
आख़िरी मिनट में उसकी आवाज़ रिकॉर्ड हुई—
“मैं कल फिर आऊँगा…”
राघव को याद ही नहीं था कि उसने ऐसा कुछ कहा था।
अगली रात
रात ठीक 12:13 बजे…
उसके मोबाइल पर एक नया ऑडियो अपने आप रिकॉर्ड हो गया।
उसने रिकॉर्डिंग चालू भी नहीं की थी।
ऑडियो में सिर्फ़ एक आवाज़ थी—
**”तुम अपना नाम भूल जाओगे…
लेकिन हम तुम्हें नहीं भूलेंगे…”**
उसके बाद धीमी हँसी सुनाई दी।
रहस्य आज भी ज़िंदा है
कुछ महीनों बाद राघव ने वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करने की कोशिश की।
हर बार फ़ाइल अपने आप करप्ट हो जाती।
लेकिन एक स्क्रीनशॉट हमेशा बच जाता।
उस स्क्रीनशॉट में सुरंग के अंदर दर्जनों धुंधली आकृतियाँ खड़ी थीं।
और सबसे आगे…
राघव खुद खड़ा था।
लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
अंत
आज भी वह सुरंग बंद है।
सरकार ने उसके चारों तरफ़ ऊँची लोहे की बाड़ लगा दी है।
फिर भी कई ट्रेकर्स दावा करते हैं कि आधी रात के बाद वहाँ से किसी के नाम पुकारने की आवाज़ सुनाई देती है।
अगर कभी किसी सुनसान सुरंग में आपको अपनी ही आवाज़ सुनाई दे…
तो उसका जवाब मत देना।
क्योंकि हर आवाज़ आपकी नहीं होती।
कुछ आवाज़ें…
सिर्फ़ आपको हमेशा के लिए अपने पास बुलाने के लिए होती हैं।
अगर आपको ऐसी horror story in hindi पसंद है, तो ऐसी unexpected stories यही याद दिलाती हैं कि हर रहस्य का सच हमारी समझ से कहीं ज़्यादा डरावना हो सकता है।
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